*“ससुर पर लगे दुष्कर्म के आरोप फेल, हाईकोर्ट ने FIR की रद्द”* हिंगनघाट- 27 मार्च 2026**********************मो मकसूद बावा पत्रकार हिंगणघाट जिला वर्धा मिडिया पोलिस टाइम विभागीय उपसंपादक **********************बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में आरोपी ससुर को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ दर्ज दुष्कर्म और छेड़छाड़ से संबंधित FIR को रद्द कर दिया। हाई कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया कोई मामला नहीं बनता और ट्रायल चलाना न्याय प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। इस मामले में हींगनघाट तहसील के वडनेर पुलिस स्टेशन में अपराध दर्ज किया गया था, जिसमें शिकायतकर्ता महिला ने अपने ससुर पर प्रारंभ में छेड़छाड़ (धारा 354A IPC) का आरोप लगाया था। बाद में दिए गए पूरक बयान में दुष्कर्म (धारा 376(2)(f) IPC) और धमकी (धारा 506 IPC) के आरोप भी जोड़े गए। सुनवाई के दौरान *अधिवक्ता आकिद मिर्ज़ा* ने अदालत को बताया के घटना के तुरंत बाद दर्ज प्रारंभिक रिपोर्ट में महिला ने न तो छेड़छाड़ और न ही दुष्कर्म का कोई आरोप लगाया था। लगभग दस दिन बाद पहली बार गंभीर आरोप लगाए गए, जिससे शिकायत की विश्वसनीयता पर संदेह उत्पन्न हुआ। सुनवाई के दौरान *अधिवक्ता आकिद मिर्ज़ा* यह भी बताया कि मेडिकल जांच में किसी प्रकार की चोट या बल प्रयोग के संकेत नहीं मिले। साथ ही, मामले की पृष्ठभूमि में वैवाहिक विवाद है, जिससे यह प्रतीत होता है कि आरोप बाद में सोच-समझकर लगाए गए हैं। निर्णय देते हुए हाईकोर्ट ने मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित सिद्धांतों का हवाला दिया और कहा कि यदि FIR में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया अपराध सिद्ध नहीं करते या दुर्भावनापूर्ण प्रतीत होते हैं, तो उन्हें रद्द किया जा सकता है। अंततः अदालत ने आरोपी ससुर के खिलाफ दर्ज FIR तथा उससे संबंधित सभी आपराधिक कार्यवाही को रद्द करते हुए स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में बिना पर्याप्त साक्ष्य के अभियोजन चलाना कानून का दुरुपयोग है।
byमीडीया पोलीस टाईम
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