*मंदिर परिसर में खड़ा बिजली का पोल बना प्रतीक भेदभाव का*

*मंदिर परिसर में खड़ा बिजली का पोल बना प्रतीक भेदभाव का*

(जहाजपुर भीलवाडा राजस्थान विभागीय संपादक गणपतलाल रेगर)

जहाजपुर क्षेत्र की उप तहसील पंडेर के जवाहर नगर में स्थित माता जी के मंदिर परिसर में खड़ा बिजली का पोल अब सिर्फ एक खंभा नहीं, बल्कि प्रशासन की लापरवाही का जीवंत प्रतीक बन चुका है। मंदिर की चारदीवारी के अंदर लगाया गया यह पोल खुले खतरे की तरह खड़ा है, जहां रोज़ाना महिलाएं, बुजुर्ग और छोटे बच्चे दर्शन करने आते हैं। जरा सी चूक और बड़ा हादसा—इस आशंका के साए में लोग पूजा करने को मजबूर हैं। कई बार स्थानीय लोगों ने प्रशासन को सूचना दी, भाजपा कार्यकर्ताओं को भी अवगत कराया गया, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ आश्वासन मिला। क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? क्या किसी मासूम की जान जाने के बाद ही यह पोल हटेगा? या फिर इसलिए अनदेखी हो रही है क्योंकि मामला दलित बस्ती से जुड़ा है? अगर यही पोल किसी वीआईपी कॉलोनी या रसूखदार इलाके में होता तो क्या तब भी इतनी चुप्पी रहती? आखिर क्यों हर बार दलित समाज की समस्याओं को हल्के में लिया जाता है? यह केवल बिजली के पोल का मुद्दा नहीं, बल्कि बराबरी और सम्मान के अधिकार का सवाल है, जिसकी बात संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर ने दशकों पहले की थी। प्रशासन को यह समझना होगा कि लापरवाही और भेदभाव दोनों ही अस्वीकार्य हैं। अगर समय रहते पोल नहीं हटाया गया और कोई दुर्घटना हुई तो उसकी सीधी जिम्मेदारी संबंधित विभाग और जिम्मेदार अधिकारियों पर होगी। अब देखना यह है कि जिम्मेदार जागते हैं या फिर हादसे का इंतजार जारी रहेगा। जहाजपुर भीलवाड़ा से खास रिपोर्ट गणपत लाल
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