भारत के अल्पसंख्यको की फ़िक्र करने बाला जल्लाद पाकस्तान देखों कैसे अपने निर्दोष लोगों का ख़ून बहा रहा हैं - क्या यही हैं इसका अमन, चेन और भाईचारा?ट्रांप और चीन का पालतू पाकिस्तान बना जल्लाद, PoK में शांति से अपने हक़ की आवाज़ उठाने वालें निहत्थे मासूम बच्चे- गर्भवती महिलाओं सहित कई निर्दोष लोगों को गोलियों से भूना, मुनीर पर थू-थू कर रही पूरी दुनिया

भारत के अल्पसंख्यको की फ़िक्र करने बाला जल्लाद पाकस्तान देखों कैसे अपने निर्दोष लोगों का ख़ून बहा रहा हैं - क्या यही हैं इसका अमन, चेन और भाईचारा?

ट्रांप और चीन का पालतू पाकिस्तान बना जल्लाद, PoK में शांति से अपने हक़ की आवाज़ उठाने वालें निहत्थे मासूम बच्चे-

 गर्भवती महिलाओं सहित कई निर्दोष लोगों को गोलियों से भूना, मुनीर पर थू-थू कर रही पूरी दुनिया

आगरा दिल्ली विभागीय संपादक संजय सिंह 

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की सड़कों पर बह रहा निर्दोषों का खून, अपने ही लोगों के हक़ अधिकार और मांगों को कुचलने में जुटी जल्लाद मुनीर की सेना

पाकिस्तान के केंद्रीय शासन और पाकिस्तानी सेना की बर्बरता के खिलाफ आवाज उठाने वाले मासूमों को कुचलने के लिए देखते ही गोली मारने तक के आदेश 

PoK Protest News: ट्रांप और चीन का पालतू पाकिस्तान से कब्जे वाला कश्मीर संभल नहीं रहा. पीओके में हालात बिगड़ चुके हैं. शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर अब अपने ही निर्दोष लोगों का ख़ून बहा रहा हैं। वही, प्रदर्शनकारी अपने हक के लिए अब आर-पार की लड़ाई लड़ रहे हैं।

खबर है कि-पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) की सड़कों पर खून बह रहा है। पाकिस्तान के केंद्रीय शासन और पाकिस्तानी सेना की बर्बरता के खिलाफ आवाज उठाने वाले मासूमों को कुचलने के लिए सैन्य आलाकमान ने प्रदर्शनकारियों को देखते ही गोली मारने तक के आदेश सुना दिए है। इसका असर यह हुआ है कि पूरे पीओके में तनाव की स्थिति है। मुजफ्फराबाद में तो सुरक्षाबल-पुलिस की तरफ से आम लोगों को निशाना बनाए जाने की भी बातें सामने आई है, जिनमें 20 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है और 200 से ज्यादा के घायल होने की खबरें है। हालांकि, असल आंकड़े क्या है, इसे लेकर कोई जानकारी सामने नहीं आई है। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में बड़े पैमाने पर हिंसक प्रदर्शनों का दौर जारी है।

शुरुआत में पाकिस्तान की सरकार और सेना के खिलाफ यह विद्रोह रावलकोट तक सीमित था। हालांकि, सुरक्षाबलों की बर्बरता के चलते अब इस प्रदर्शन का फैलाव मुजफ्‌फराबाद, गिलगित-बाल्टिस्तान, मीरपुर, ददियाल, सुधनोती, और भीमबर जैसे कई अन्य प्रमुख इलाकों में फैल गया है। पाकिस्तानी प्रशासन ने दमनकारी नीतियां अपनाते हुए जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) नाम के संगठन के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस ने 100 से ज्यादा जेएएसी सदस्यों को गिरफ्‌तार कर लिया है और मुजफ्‌फराबाद स्थित उनके केंद्रीय कार्यालय पर छापा मारकर उसे सील कर दिया है। 

खबर है कि पाकिस्तानी साराकार प्रदर्शनकारी नेताओं पर हत्या जैसे गंभीर आरोपों के पुराने मुकदमों को दोबारा खोलने की तैयारी कर रही है। क्षेत्र से जानकारी को बाहर आने से रोकने के लिए इंटरनेट और मोबाइल डेटा सेवाओं को 12 जून तक के लिए पूरी तरह से निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही बाहरी लोगों और पर्यटकों को 20 जून तक इस क्षेत्र में यात्रा न करने और जो वहां मौजूद है उन्हें तुरंत इलाका छोड़ने का निर्देश दिया गया है। 

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में हो रहे इन प्रदर्शनों के नेतृत्व में मुख्य रूप से जम्मू कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) नाम के संगठन को खास तौर पर पाकिस्तानी आर्मी और शासन की तरफ से निशाना बनाया जा रहा है। 

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में प्रदर्शन जारी है. पाकिस्तानी सेना प्रदर्शन दबाने में लगी है. उन पर गोलियां चला रही हैं. आवाम की आवाज दबाने को मुनीर की आर्मी लाठी-डंडे भाज रही है. प्रदर्शनकारी अपना हक मांग रहे हैं. पीओके में आर्थिक सुधारों की मांग कर रहे हैं. मगर मुनीर की सेना है कि उनकी आवाज को दबाने के लिए उनकी हत्या ही कर रही है. जी हां, खुफिया रिपोर्ट की मानें तो पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में अब तक दर्जनों प्रदर्शनकारियों की हत्या हो चुकी है. इसमें भी हैरानी की बात है कि मरने वालों में बच्चे और गर्भवती महिलाएं सबसे अधिक हैं.

दरअसल, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं. एक खुफिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 5 जून से 9 जून के बीच पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई में 19 बच्चों और 7 गर्भवती महिलाओं सहित कई निर्दोष लोगों की मौत हुई है. रिपोर्ट के मुताबिक, यह पीओके में हिंसा उस समय शुरू हुई, जब आर्थिक और राजनीतिक अधिकारों की मांग कर रहे संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के खिलाफ पाकिस्तान सरकार और सेना ने सख्त कार्रवाई शुरू की. जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी पर पाकिस्तान ने आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत बैन लगा दिया है.

कैसे पाकिस्तान मचा रहा कत्लेआम

टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक, खुफिया रिपोर्ट में कहा गया है कि संकट की शुरुआत बरमंग ब्रिज पर हुई गोलीबारी से हुई. इसके बाद पूरे क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन फैल गए. हालात तब और बिगड़ गए जब JAAC के कार्यकारी सदस्य शाहजेब हबीब की कथित तौर पर सेना द्वारा हत्या कर दी गई. हबीब की मौत के बाद हजारों लोग सड़कों पर उतर आए और पाकिस्तान सरकार के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हो गए.

बच्चे-महिलाओं को भी मुनीर की सेना ने नहीं छोड़ा

आधिकारिक आंकड़ों में 11 पुरुषों की मौत की पुष्टि हुई है. हाालंकि, खुफिया रिपोर्ट पाकिस्तान सरकार की पोल खोलती दिख रही है. इस रिपोर्ट में बताया गया है कि मारे गए लोगों में 19 बच्चे और 7 गर्भवती महिलाएं भी शामिल थीं. पाकिस्तान ने पीओके में बवाल थामने के लिए 14,000 मुख्यधारा के सैनिक तैनात किए हैं. पूरे पीओके में इंटरनेट सर्विस बंद है. बताया गया है कि 7 जून को शाहजेब हबीब के जनाजे में शामिल लोगों पर सुरक्षा बलों ने लाठीचार्ज किया, आंसू गैस छोड़ी और बाद में गोलीबारी भी की. रिपोर्ट के अनुसार, उस समय बड़ी संख्या में निहत्थे लोग मौजूद थे.

क्यों पीओके में है बवाल

रिपोर्ट के अनुसार, यह अशांति राजनीतिक हाशिए पर डाले जाने और क्षेत्र के जल-विद्युत संसाधनों के शोषण से उपजी है, जिससे मुख्य पाकिस्तान को फायदा हो रहा है, जबकि स्थानीय लोग लगातार बिजली कटौती पानी की कटौती और महंगे बिलों और मेहंगी खाद सामग्री (आटा चावल तेल व अन्य) से जूझ रहे हैं. JAAC ने 38 सूत्रीय मांग पत्र के जरिए जनता को एकजुट किया था, जिसमें सस्ती गेहूं सब्सिडी बहाल करने, नेताओं की सरकारी सुविधाएं खत्म करने, क्षेत्रीय संसाधनों का हक दिलाने और इस्लामाबाद के दखल के बिना स्थानीय शासन की मांग शामिल थी.

रिपोर्ट के मुताबिक, 9 जून को करीब 45 लाख कश्मीरी नागरिकों से बड़े मार्च में शामिल होने की अपील की गई थी. इसी दौरान कई जिलों में हिंसा भड़क उठी. भीमबर क्षेत्र में प्रदर्शनकारियों के काफिलों पर आसिम मुनीर की सेना की ओर से रूप से गोलाबारी की गई. इसी गोली बारी में कत्लेआम मच गया. अब पूरी दुनिया मुनीर पर थू-थू करेगी. बहरहाल, अब तक पीओके प्रदर्शन में 30 से अधिक नागरिकों के मारे जाने का दावा किया गया है.

जारी है पाकिस्तान का पीओके में दमन

रिपोर्ट के मुताबिक, हबीब की हत्या के बाद हिंसा और बढ़ गई. पाक सेना ने बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां शुरू कीं, सैकड़ों नागरिक, महिलाओं और नेताओं को हिरासत में लिया और JAAC के मुख्यालय को सील कर दिया. 7 जून को सुरक्षा बलों ने हबीब की नमाज-ए-जनाजा में जुटे शोकाकुल लोगों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और सीधी गोलीबारी की. सबसे चौंकाने वाला दावा यह है कि PoK पुलिस के सब-इंस्पेक्टर सरदार इनायत को पाकिस्तानी सेना ने इसलिए मार दिया क्योंकि उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने के आदेश का पालन करने से इनकार कर दिया था.

जेएएसी क्या हैः यह नागरिक अधिकार समूहों, व्यापारियों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और सामाजिक-धार्मिक संगठनों का एक व्यापक गठबंधन है। यह एक जमीनी स्तर का आंदोलन है जो पीओके के लोगों के आर्थिक और राजनीतिक अधिकारों की वकालत करता है। नेतृत्व किसके पासः इस संगठन और मौजूदा आंदोलन का नेतृत्व कार्यकर्ती शौकत नवाज मीर कर रहे है।
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