*"नकीर खान: वोटों के गणित में पिछड़े, पर जनता के दिल में सबसे आगे!"*. अकोला:सियासत में अक्सर जीत का जश्न मनाया जाता है और हारने वाले भुला दिए जाते हैं। लेकिन अकोला महानगर पालिका चुनाव 2026 के प्रभाग क्रमांक 11 के नतीजों ने एक नई इबारत लिख दी है। यहाँ भले ही सर्टिफिकेट किसी और के हाथ में गया हो, लेकिन चर्चाओं के केंद्र में सिर्फ एक ही नाम है— नकीर खान।कांटे का मुकाबला, सम्मान की जंगअजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार नकीर खान ने इस बार ऐसा चुनाव लड़ा जिसकी गूँज पूरे शहर में सुनाई दी। चुनावी पंडितों की मानें तो नकीर खान ने वोटों के गणित को जिस तरह चुनौती दी, उसने बड़े-बड़े दिग्गजों की नींद उड़ा दी थी। वह कुछ ही वोटों के मामूली अंतर से पिछड़ गए, लेकिन यह हार उन्हें कमजोर करने के बजाय और भी मजबूत नेता बनाकर उभरी है।जनता का अटूट विश्वासजनता के बीच ऐसे नेता की छवि है जो हमेशा मदद के लिए खड़ा रहता है। चुनाव परिणामों के बाद क्षेत्र के लोगों का कहना है कि "हमने अपना प्रतिनिधि नहीं, बल्कि अपना भाई और बेटा चुना था, और हमारे लिए वे आज भी विजेता हैं।" यही वह 'सच्ची कमाई' है जिसे कोई भी चुनावी परिणाम कम नहीं कर सकता।'बाजीगर' की तरह स्वीकार की हारचुनाव नतीजों के बाद जिस परिपक्वता का परिचय दिया, उसने विरोधियों का भी दिल जीत लिया। उन्होंने हार का ठीकरा किसी पर फोड़ने के बजाय जनता के प्यार को सर-आंखों पर रखा। सोशल मीडिया पर समर्थकों ने सही ही लिखा है— 'हारकर जीतने वाले को बाजीगर कहते हैं।'"चुनाव तो एक प्रक्रिया है, मेरा असली मकसद जनता की खिदमत करना है। हर नागरिक का शुक्रिया जिन्होंने मुझ पर भरोसा जताया। वादा करता हूँ कि पद रहे न रहे, संघर्ष और सेवा आपके लिए हमेशा जारी रहेगी।"

"नकीर खान: वोटों के गणित में पिछड़े, पर जनता के दिल में सबसे आगे!"*.                                                                
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